सिवनी। जीवन में जब अच्छा काम करने का विचार आए तब उसे तत्काल करना चाहिए और जब किसी का बुरा करना हो तब उसे टालना चाहिए। उक्ताशय की बात शुक्रवार को श्री विद्या उपासक आचार्य श्री हितेंद्र पांडे मातृधाम (काशी) ने भगवती सर्वमंगला माता मंदिर परिसर ग्राम नरेला में जारी सार्वजनिक श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा व 9 लाख दुर्गा अर्चन महोत्सव में श्रद्धालुजनों से कही।
उन्होंने आगे कहा कि अपने माता-पिता की सेवा करना चाहिए, समाज में रहने वाले जो दीन-दुखी, निर्बल है, निर्धन है उनकी सेवा करनी चाहिए। यही जीवन का सार है।
स्वम् के लिए सुख का काम करें तो इससे आपको थोड़ी देर आनंद मिलेगा और जिस दिन आपने दूसरों के आनंद में आनंद खोजना प्रारंभ कर दिया। उस दिन ही परमानंद प्राप्त हो जाता है।
माता सीता क्या यह नहीं जानती थी की सोने का भी मृग हिरण हो सकता है। साधारण सी बात आप समझिए क्या मां सीता यह नहीं जानती थी कि सोने का मृग होता है। इसीलिए कहा जाता है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि। ऐसे समय बड़े शांत हृदय से विचार करके कार्य करना चाहिए। पर भगवान को लीला करना था। रावण , राक्षसों का नाश करना था। इसलिए उन्होंने लीला की।
शहर सीमा से लगे ग्राम नरेला में प्रतिदिन सुबह 11 बजे दुर्गा अर्चन किया जाता है। वही दोपहर 1.30 बजे से देवी कथा प्रारंभ होती है। शनिवार को माघ शुक्लपक्ष6 शक्ति पीठों की उत्तपत्ति राजा निमि व हरिश्चंद्र उपाख्यान शिव पार्वती विवाह की कथा सुनाई जाएगी। वही कथा का विश्राम 27 जनवरी को सौभाग्यवती पूजन एवं यज्ञ की पूर्णाहुति एवं महाप्रसाद वितरण के साथ होगा।






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