सिवनी। भागवत कथा सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाती है, साथ ही जीवन का कल्याण करती है। ये बातें पांजरा (केवलारी) में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को बोरीयाकला शंकराचार्य आश्रम रायपुर से पधारे कथा व्यास परमपुज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी डॉ. श्री इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने श्रद्धालुजनों से कहीं।
कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य, परीक्षित उपाख्यान और शुकदेव जी के आगमन का वर्णन किया। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पर जोर देते हुए बताया कि कृष्ण कथा जीवन का कल्याण करती है। बताया कि राजा परीक्षित ने कलयुग के प्रभाव में आकर शमीक ऋषि के गले में मृत सांप डाल दिया, जिसके बाद ऋषि के पुत्र ने उन्हें सात दिन में मरने का श्राप दे दिया। इसके बाद राजा परीक्षित ने अपना राज्य छोड़ दिया और गंगा किनारे जाकर प्रायश्चित करने लगे, जहां शुकदेवजी ने भागवत कथा सुनाकर उन्हें मुक्ति दिलाई।
कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा श्रवण मात्र से ही पापों से मुक्ति मिलती है और यह ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुलभ साधन है।




ताजासमाचार ग्रुप से जुड़ने लिंक मांग सकते हैं। वाट्सएफ नम्बर 94 2462 9494 से । या न्यूज के नीचे जाए और दिए गए वाट्सएफ जवाइन निर्देश बॉक्स में दो बार क्लिक कर ग्रुप में ज्वाइन हो सकते हैं। संतोष दुबे, सिवनी।

