अमरवाड़ा/छिंदवाड़ा। मन रूपी रथ में हमेशा सात्विक, धार्मिक, आचार-विचार को ही सहेज कर बिठाना चाहिए। रूखा व्यक्ति परमात्मा को नही पा सकता है। जिसका चित्त ही ठीक न हो, मन अशांत हो, जो मन से हमेशा बीमार हो, ऐसे आदमी को भगवान नही मिलते। मुस्कुराने वाले व्यक्ति को पहले परमात्मा मिलते हैं। उक्ताशय की बात अमरवाड़ा तहसील के गांव मरकावाड़ा में जारी श्री राम कथा में राष्ट्रीय कथा वाचक अतुल महाराज रामायणी श्रीधाम वृंदावन ने श्रद्धालुओं से कही।
उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य को उत्तम जीवन जीने की कला सिखाती है। पूजा में भाव की महत्ता होती है। प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। यदि हम राम को पाना चाहते हैं, तो वे हमें अनुराग से प्राप्त होंगे। प्रभु की छवि को ही मन में बसाना होगा।
कथा आयोजन सेवक राम चंद्रवंशी ने बताया कि कथा का समापन 24 जनवरी को होगा। व रविवार 25 जनवरी को हवन पूर्ण आहुति एवं महाप्रसाद भंडारा का वितरण किया जाएगा।










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