सिवनी। संकट की घड़ी में मनुष्य को केवल भगवान का ही स्मरण करना चाहिए। चतुर्थ स्कंध में लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती जी के स्वरूपों का विशेष वर्णन किया गया। उक्ताशय की बात पंडित हितेंद्र शास्त्री ने पिपरियाकला (केवलारी) में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धालुजनों से कहीं।
आचार्य श्री हितेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह 9 मार्च दिन सोमवार परमपूज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी डॉ. श्री इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के करकमलों के द्वारा होगा।
उन्होंने आगे कहा कि सच्चा गुरु वही है , जो शिष्य को ईश्वर से जोड़े, न कि आडंबर में उलझाए। श्रीमद् भागवत को पवित्र ग्रंथ और वेदों का सार बताते हुए उन्होंने इसे कलयुग में मुक्ति का श्रेष्ठ साधन बताया। यह ग्रंथ जीवन मरण के बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाला, आयु बढ़ने वाला, पापों का नाश करने वाला तथा कलयुग में सबसे उत्तम साधन मार्ग माना जाता है।
उन्होंने कहा कि, यह ग्रंथ जीवन मरण के बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाला, आयु बढ़ने वाला, पापों का नाश करने वाला तथा कलयुग में सबसे उत्तम साधन मार्ग माना जाता है।









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