छिंदवाड़ा। आर्मी से सेवानिवृत्त होने के बाद मोहन घंगारे अब छिंदवाड़ा विधानसभा से राजनीतिक मैदान में है। चुनाव चिन्ह नागरिक है। उनका अब तक का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। उनका जन्म बिछुआ के पुलढोह में हुआ। जब वे दस साल के थे उसी समय उनके पिता का देहांत हो गया। पिता कृषि का व्यवसाय करते थे। सात भाई एवं दो बहनों में वे तीसरे नंबर के थे। पिता के देहांत के बाद उनके कंधों पर भी परिवार को चलाने का बोझ आ गया। इसके बाद वे प्रतिदिन 15 किलोमीटर पैदल चलकर मजदूरी करने जाते थे। उनके अंदर प्रारंभ से ही देशसेवा का जब्बा था। उन्होंने मजदूरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और महज 19 साल की उम्र में आर्मी में चयनित हो गए।
26 साल आर्मी में सेवा करने के बाद जब वे छिंदवाड़ा लौटे तो उन्हें घर बैठना गवारा नहीं था। उन्होंने युवाओं को लेकर बड़ी मुहिम छेड़ दी। छिंदवाड़ा को फिजिकल में नंबर-वन बनाने का संकल्प लिया। वे कई वर्षों से छिंदवाड़ा में युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए उनके साथ दिन रात मेहनत कर रहे हैं। गरीब युवाओं को निशुल्क कोचिंग देते हैं। इसके अलावा पर्यावरण, नशामुक्ति, योग का प्रचार-प्रसार गांव-गांव कर रहे हैं।
शिविर लगाकर लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि छिंदवाड़ा को मध्यप्रदेश का पहला विकसित जिला बनना है। जब तक यह मुहिम पूरी नहीं हो जाती वे रूकेंगे नहीं। उन्होंने इसी वजह से छिंदवाड़ा विधानसभा में प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है और चुनाव लड़ रहे हैं।



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