test
Breaking
27 May 2026, Wed

गृहस्थ आश्रम में संयम और अंतःकरण की शुद्धता के साथ धर्म का पालन भी वैराग्य है : आचार्य श्री हितेंन्द्र पाण्डेय

सिवनी। छोटी मुंगवानी खुर्द में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास श्री विद्या पूर्णभिधिक आचार्य श्री हितेंन्द्र पाण्डेय जी महाराज (मात्रधाम, काशी) ने कहा कि घर- वार छोड़कर वन में चले जाना ही वैराग्य नहीं है अपितु गृहस्थ आश्रम में संयम और अंतःकरण की शुद्धता के साथ धर्म का पालन भी वैराग्य है। भगवान् के प्रति निष्ठावान होकर की गई दिनचर्या के प्रत्येक कर्म पूजा के समान होता है और संयमित जीवन तपश्चर्या के समान होते है।

राजा परीक्षित को वाणी का श्राप मिला है इसलिए उसकी वाणी से ही श्राप काटना चाहिए। सुखदेव जी प्रसन्न हुए और आकर के वहां बैठ जाते हैं राजा परीक्षित के पास में। राजा परीक्षित ने गंगा जी के तट में जितना संभव हो सका सुखदेव जी महाराज का पूजन किया, उनको नमन किया और जाकर के प्रश्न पूछते हैं परीक्षित ने पूछा कि मनुष्य जीवन में आकर उसको क्या करना चाहिए और दूसरा प्रश्न किया जिसकी मृत्यु निकट आ जाए या जिसको अपनी छाया में, दर्पण में अपनी नाक टेढ़ी दिखाई देने लगे जिसको तरह-तरह के सपने में यमराज दिखाई देने लगे हैं, जिनको मृत्यु का आभास होने लगे अर्थात सुखदेव जी जिनकी मृत्यु निकट आ जाए उस जीव को क्या करना चाहिए। यह दो प्रश्न राजा परीक्षित ने पूछे हैं। मनुष्य तन में क्या करना चाहिए इन्हीं दोनों प्रश्नों का उत्तर श्री सुखदेव जी महाराज ने दिया।

कथा आयोजक सीताराम – सावित्री सनोडिया, कमोद सनोडिया, अतरसिंह सनोडिया, जागेश्वर सनोडिया, सुनील सनोडिया ने बताया कि कथा 1 जून को विश्राम लेगी वही कथा श्रवण में गर्मी का ध्यान रखते हुए यहां श्रद्धालुजनों के लिए पंखा, कूलर, पेयजल की उचित व्यवस्था भी की गई है।

ताजासमाचार ग्रुप से जुड़ने लिंक मांग सकते हैं। वाट्सएफ नम्बर 94 2462 9494 से । या न्यूज के नीचे जाए और दिए गए वाट्सएफ जवाइन निर्देश बॉक्स में दो बार क्लिक कर ग्रुप में ज्वाइन हो सकते हैं। संतोष दुबे, सिवनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *