सिवनी। शंखनाद, घण्टनाद, वेदमंत्रो की गूंज और द्वारकाधीश की जयघोष के बीच पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने विग्रह के हृदय पर अपने दिव्य दण्ड का स्पर्श कराया और भगवान श्री राधाकृष्ण की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ नगर के द्वार पर विराज गए, भगवान द्वारकाधीश, अब सिवनी में एक आध्यात्मिक चेतना की बयार हमेशा बहती रहेगी ।
श्री द्वारकाधीश मन्दिर में श्री राधाकृष्ण प्राण-प्रतिष्ठा-यज्ञ की गुरुवार को पूर्ण आहुति हुई, मन्दिर ने कलशारोहण, कुंभाभिषेक के बाद श्री राधाकृष्ण की मनोहारी छवि के प्रथम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया, कोई भोग लाया तो कोई, तुलसी माला, कोई गुलाब की, सीलादेही के ग्रामवासियों ने लीलाधारी भगवान को 56 भोग लगाया ।
इस अवसर पर द्वारका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज, ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी, रायपुर आश्रम से दण्डी स्वामी इंदुभावानंद जी, बालाभवानी आश्रम से स्वामी राघवानंद, कथा व्यास, गीता मनीषी ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप महाराज, पीठ शास्त्री संतु महाराज यज्ञाचार्य पंडित सनत कुमार उपाध्याय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।
अनादि की भजन संध्या आज – श्री द्वारकाधीश मन्दिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के विश्राम दिवस शुक्रवार 27 फरवरी को जबलपुर के अनादि मिश्रा के द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी जावेंगी, प्रसिद्ध गायिका ममता सत्यार्थी भी शामिल होंगी।



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