सिवनी। विश्वगीताप्रतिष्ठानम् द्वारा मनाए जाने वाले सप्त उत्सवों में द्वितीय प्रमुख हनुमत् प्राकट्योत्सव के अवसर पर गुरुवार, 02 अप्रैल 2026 (चैत्र शुक्ल पूर्णिमा, विक्रम संवत् 2083) को स्वाध्याय मंडल सिवनी हनुमान मंदिर, महामाया मंदिर परिसर, भैरोगंज में श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वज पूजन पश्चात ध्वजारोहण के साथ किया गया, जिसमें श्री हनुमानजी के चित्र युक्त ध्वज फहराया गया। इसके पश्चात हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड का पाठ किया गया अनंतर श्रीमद्भगवतगीता के भक्ति योग का गायन अनु गायन किया गया ।अंत में आरती उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। इस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रार्थना एवं भजन-कीर्तन कर आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया।
इस अवसर पर वक्ताओं, जिला संयोजक श्री घनश्याम प्रसाद दुबे एवं कोषाध्यक्ष ताराचंद मिश्रा ने बताया कि श्री हनुमान जी ने अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान होकर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण से गीता का ज्ञान प्राप्त किया था, इसी कारण अर्जुन को “कपिध्वज” कहा जाता है। श्री हनुमान जी अर्जुन के रथ की ध्वजा के शीर्ष पर क्यों विराजित हुए इसके संदर्भ में पौराणिक प्रसंग का दृष्टांत देते हुए सर सारगर्भित जानकारी दी। हनुमत् प्राकट्योत्सव का उद्देश्य भक्ति, सेवा और ज्ञान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह जन सामान्य से किया।
कार्यक्रम में स्वाध्याय मंडल के सदस्यों, महामाया मंदिर समिति के सदस्य एवं श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता रही ।अंत में सभी ने उत्सव को गरिमापूर्ण रूप से मनाने का संकल्प लिया।
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