किताब “धुंध से रोशनी तक” अंधेरे से आगे बढ़ाने की कहानी
सिवनी। होनहार बिरवान के होत चीकने पात वाले मुहावरे को सही साबित करते हुए इस डिजिटल युग की तेज रफ्तार दुनिया से निकलकर युवा अब किताबों की ओर लौट रहे हैं। जो केवल पढ़ने की आदत का नहीं बल्कि सोच में भी एक बड़े बदलाव का संकेत है।
मध्य प्रदेश के सिवनी जिला मुख्यालय के गंगानगर निवासी युवा लेखक जय शुक्ला ने स्वप्रेरणा से एक किताब लिख डाली। युवा किताबों के पन्नों में ठहरने लगे हैं तो यह बदलाव सिर्फ पढ़ने की आदत का नहीं सोच का भी है। युवा लेखक जय शुक्ला ने “धुंध से रोशनी तक” नामक शीर्षक की एक किताब लिखी जो अंधेरे से आगे बढ़ाने की कहानी है।
जय शुक्ला का बचपन से एक सपना था कि वे अपनी फीलिंग को अपने शब्दों में लिखें और उन्होंने यह अपनी पहली किताब में किया।
अमेजन में उपलब्ध इस किताब में हर उस इंसान की कहानी है जो हर दिन खुद से लड़ता है और फिर भी आगे बढ़ता है।
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