सिवनी। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में इन दिनों रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत देखी जा रही है। उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन एजेंसियों से उन्हें सिर्फ ‘स्टॉक खत्म’ होने का आश्वासन मिल रहा है।
लंबी कतारें – शहर की प्रमुख गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 8 बजे से ही लोग खाली सिलेंडर लेकर लाइन में लग रहे हैं।
बुकिंग का इंतज़ार: कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने 15 से 20 दिन पहले सिलेंडर बुक किया था, लेकिन अभी तक होम डिलीवरी तो दूर, गोदाम से भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है।
महिलाओं का आक्रोश – रसोई का बजट बिगड़ने और समय पर गैस न मिलने से गृहिणियों में भारी गुस्सा है। लोगों का आरोप है कि उन्हें मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों या महंगे इंडक्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।
कालाबाजारी की आशंका – स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि घरेलू गैस की किल्लत के बीच कमर्शियल उपयोग के लिए सिलेंडरों की कालाबाजारी हो रही है। होटलों और ढाबों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का उपयोग देखा जा सकता है, जबकि आम आदमी एक अदद सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़ा है।
प्रशासन की चुप्पी – हैरानी की बात यह है कि जिले में हफ्तों से जारी इस अव्यवस्था पर खाद्य विभाग या जिला प्रशासन ने अब तक कोई सख्त रुख नहीं अपनाया है। न तो सप्लाई चेन को दुरुस्त करने की कोशिश दिख रही है और न ही कालाबाजारी करने वालों पर कोई कार्रवाई हुई है।
“हम सुबह से काम-धंधा छोड़कर लाइन में लगते हैं, दोपहर को बोला जाता है कि गाड़ी नहीं आई। हमारी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है।” – एक स्थानीय पीड़ित उपभोक्ता
सिवनी की जनता अब उग्र आंदोलन की राह पर है। यदि जल्द ही गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू नहीं किया गया, तो कलेक्ट्रेट घेराव जैसी स्थिति बन सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद से कब जागता है।
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