यहां धुरेड़ी पर नहीं उड़ता रंग गुलाल, दूसरे दिन खेली जाती है होली
सिवनी। होलिका दहन के दूसरे दिन पूरे भारत में रंग और गुलाल खेला जाता है। पहलाद और उसकी बुआ होलीका की कहानी और असत्य पर सत्य की जीत का यह पर्व पूरे देश में रंग और अबीर उड़कर मनाया जाता है लेकिन सिवनी जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में धुरेड़ी फीकी रहती है। इस दिन इन इलाकों में मेघनाथ का पूजन किया जाता है।
रावण की वंशज मेघनाथ को जिले के आदिवासी इलाकों में किसी देवता की तरह पूजा जाता है। तीन खंबो के सहारे एक विशाल खंबा मध्य में स्थित होता है जिसके ऊपर चढ़कर वो भक्त उल्टा झूलते हैं जिनकी मन्नत पूरी हो जाती है।
मंगलवार को जिले की केवलारी विकासखंड के पांजरा में मेघनाथ पूजन का आयोजन हुआ जिसमें आसपास के इलाकों के सैकड़ो लोगों ने हिस्सा लिया।
दिल्ली के दूसरे इलाकों में बुधवार को मेघनाथ का पूजन किया जाएगा और भाई दूज के दिन रंग गुलाल की होली खेली जाएगी। आदिवासी अंचलों में मेघनाथ पूजन का सिलसिला सदियों से चला रहा है जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोग हिस्सा लेते हैं।
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