सिवनी। नगर के शिव नगर कॉलोनी ग्राम मरझोर, सिवनी में जारी श्रीमद्भागवत भगवान कथा में शनिवार को कथा वाचक पं. आचार्य श्री मुन्नालाल शास्त्री ने श्रद्धालुजनों से कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही मार्ग दिखाने वाली अमृतधारा है। वहीं आगे कहा कि जब-तब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाते हैं, पर जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं, उसे दर्शन देते हैं।
मरझोर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। उन्होंने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कथा सुनाई, जिसमें झांकी भी प्रस्तुत की गई। कथा में बताया गया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने 16,000 कन्याओं से विवाह किया और रुक्मिणी स्वयं लक्ष्मी हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणि के साथ संपन्न हुआ। रुक्मिणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। कथा में समझाया गया कि रुक्मिणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकतीं। भगवान श्रीकृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। इस दौरान श्रीकृष्ण और रुक्मिणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।
कथा आयोजक खड़कचंद कश्यप (सनोडिया) ने बताया की कथा विश्राम, 9 फरवरी, दिन-सोमवार को महाप्रसाद भंडारा के साथ होगा।
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