7 Feb 2026, Sat

हिंदी विभाग की छात्राओं ने नेट परीक्षा में लहराया सफलता का परचम

सिवनी। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस के हिंदी विभाग की तीन छात्राओं ने दिसंबर 2025 में आयोजित नेट परीक्षा में सफलता हासिल की है। पिछले 15 वर्षों से हिंदी विभाग नेट और सेट परीक्षा में सफलता अर्जित करने और महाविद्यालय में स्वस्थ शैक्षिक माहौल निर्मित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

हिंदी विभाग के प्रोफेसर सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने जानकारी देते हुए बताया कि छात्रा आयशा अंसारी, रानी पगारे और सुष्मिता कुर्वेती ने दिसंबर 2025 में आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में सफलता हासिल कर हिंदी विभाग और काॅलेज का गौरव बढ़ाया है। बताया कि कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए नेट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। यूजीसी के निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी प्रतिवर्ष नेट परीक्षा आयोजित करती है. तीनों छात्राओं ने पिछले सत्र में ही अपनी एमए की डिग्री पूरी की है।


रानी पगारे

अभावों से जूझते हुए रानी ने पाई सफलताआदिवासी बहुल विकासखंड कुरई के ग्राम बकोड़ी निवासी रानी पगारे ने आर्थिक अभावों से जूझते हुए नेट परीक्षा की तैयारी की। रानी के पिता राधेश्याम पगारे और माँ विमला पगारे खेती-बाड़ी से अपना जीवन यापन करते हैं। रानी की तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है. छोटा भाई भी एमए कर रहा है, जिसने हर समय रानी की मदद की।

नेट परीक्षा में सफलता के लिए मूल संदर्भ किताबों का अध्ययन किया और मोबाइल के माध्यम से भी उसने अपनी पढ़ाई की. अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हुए रानी ने बताया कि प्रोफेसर सत्येन्द्र शेन्डे उसके प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक रहे हैं. बताया कि प्रोफेसर शेन्डे ने पुस्तकें उपलब्ध कराई और हमेशा हौंसला बढ़ाया. रानी ने बताया कि विभाग की शिक्षिका छाया राय ने भी सफलता के लिए प्रेरित किया. रानी का सपना असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर शिक्षा का उजियारा फैलाना है।

हर वर्ष नेट उत्तीर्ण विद्यार्थी देना हिंदी विभाग का लक्ष्य – प्रो. सत्येन्द्र शेन्डे – प्रोफेसर शेन्डे ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से हिंदी विभाग से हर वर्ष कोई न कोई विद्यार्थी नेट परीक्षा उत्तीर्ण करता है. हिंदी विभाग के कुछ विद्यार्थी लोक सेवा आयोग से चयनित होकर नियमित प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. हिंदी विभाग को अपने विद्यार्थियों पर गर्व है।

प्रोफेसर शेन्डे ने बताया कि व्यक्तिगत रुप से भी वे अपने छात्र-छात्राओं की यथासंभव मदद करते हैं. अपने पास की किताबें भी अध्ययन के लिए देते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपने घर बुलाकर भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर सहायता करते हैं।

आयशा अंसारी

आयशा ने जुनून से पाई सफलता – छपारा विकासखंड के गांव भरगा निवासी आयशा अंसारी कॉलेज में हिंदी की प्रोफेसर बनकर उच्च शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को आगे बढ़ाना चाहती हैं। यूजी में गणित और कंप्यूटर साइंस होने के बावजूद उन्होंने हिंदी में एमए किया और नेट परीक्षा में सफलता के लिए जुनून के साथ तैयारी की। आयशा ने बताया कि समय प्रबंधन, संदर्भ किताबें और नोट्स नेट में सफलता के लिए बेहद आवश्यक हैं. बताया कि उसके माता-पिता और भाई ने हमेशा सहयोग किया। प्रोफेसर सत्येंद्र शेन्डे को वह अपना आदर्श मानती हैं. बताया कि प्रोफेसर शेन्डे ने नेट परीक्षा में सफलता के लिए हमेशा मनोबल बढ़ाया।

सुष्मिता कर्वेती

सुष्मिता की प्रोफेसर बनने की राह हुई आसान – आदिवासी बहुल विकासखंड कुरई के छोटे से गाँव पतरई की रहने वाली हिंदी विभाग की छात्रा सुष्मिता कर्वेती ने अपने गुरु प्रोफेसर सत्येन्द्र शेन्डे से प्रेरित होकर कॉलेज में प्रोफेसर बनने की ठानी। इसके लिए सुष्मिता ने जमकर तैयारी की। नेट परीक्षा पास करने के बाद सुष्मिता की प्रोफेसर बनने की राह आसान हो गई है। अपने पिता सुंदरलाल कर्वेती, माँ चौशीला कर्वेती और अपने गुरु को प्रेरणा स्रोत मानने वाली सुष्मिता ने बताया कि वह उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बनकर गाँव के युवाओं को प्रेरित करना चाहती है।

हिंदी विभाग की तीनों छात्राओं की सफलता पर प्राचार्य डॉ रविशंकर नाग, हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ सविता मसीह , प्रोफेसर सत्येन्द्र शेन्डे, जनभागीदारी शिक्षक छाया राय और अमितोष सनोडिया सहित काॅलेज स्टाफ ने बधाई देते हुए सफल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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