सावित्रीबाई फुले की 195 वीं जयंती पर हुआ आयोजन

भारतीय ज्ञान परंपरा में सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय

सिवनी। आधुनिक भारत में स्त्री सशक्तिकरण, महिला अधिकार और स्त्री शिक्षा का उजियारा फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 195 भी जयंती पर पर पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस में पुण्य स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्राध्यापकों के वक्तव्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष और योगदान को जाना, समझा और आत्मसात् करने का प्रण किया। राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में सावित्रीबाई फुले के छायाचित्र पर छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

आधुनिक भारतीय समाज के निर्माण में सावित्रीबाई फुले का योगदान विषय पर प्राचार्य डॉ रविशंकर नाग ने कहा कि समरसतावादी समाज के निर्माण में सावित्रीबाई फुले ने अपना पूरा जीवन लगा दिया. उन्होंने अशिक्षा का अंधकार मिटाने के लिए अथक प्रयास किये. भारतीय महापुरुषों का उदाहरण देते हुए डॉ. ने नाग कहा कि आज भारतीय समाज को एक होकर आगे बढ़ना होगा. सावित्रीबाई फुले महान भारतीय महापुरुषों ने शामिल हैं।

विशेष वक्ता प्रोफेसर सत्येन्द्र शेन्डे ने कहा कि आधुनिक भारत में महिलाओं की शिक्षा के लिए सावित्रीबाई फुले ने ऐतिहासिक कार्य किया. अपने पति महात्मा फुले के साथ मिलकर 1848 में बालिकाओं की शिक्षा के लिए भारत का पहला महिला स्कूल खोला. सावित्रीबाई फुले ने रूढ़िवाद और अंधविश्वास को खत्म करने का संदेश दिया . महिलाओं को शिक्षित करने के साथ ही महिला सशक्तिकरण के प्रयास किये. बताया कि सावित्रीबाई फुले ने मराठी भाषा में कविताएं लिखीं. आज 21वीं सदी में भी सावित्रीबाई फुले की कविताएं बेहद प्रासंगिक हैं. कहा कि आधुनिक भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा के निर्माण में सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय है।

विशेष वक्ता के रूप में डॉ मानसिंह बघेल ने कहा कि बेसहारा विधवा महिलाओं को आश्रय देने के लिए सावित्रीबाई फुले और उनके पति महात्मा फुले जी ने आश्रम भी खोले थे . उन्होंने अपने वक्तव्य में सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए जन भागीदारी शिक्षक उमाशंकर वर्मा ने बताया कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षित करने के साथ ही महिला सशक्तिकरण के प्रयास किये. फुले दंपति ने अंग्रेजी सरकार को भारतीय जातिवाद की समस्या से अवगत कराया. कहा कि भारतीय शिक्षा के इतिहास में सावित्रीबाई फुले का नाम आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षक के रूप में हमेशा अमर रहेगा. कहा कि उनके सिद्धांत‌ और शिक्षा हमारी धरोहर हैं।

कार्यक्रम में डाॅ रचना राय, डॉ ज्योति गजभिये, डॉ मुन्ना लाल चौधरी, डॉ. रामकुमार नायक, डॉ श्यामसिंह राहंगडाले, प्रो दीक्षा पटले, डॉ रत्नेश सैनी, डाॅ नागले, नीलम कश्यप सहित कॉलेज स्टाफ और पीजी तथा यूजी कक्षाओं के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. डॉ रचना राय ने आभार जताया. वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

ताजासमाचार ग्रुप से जुड़ने लिंक मांग सकते हैं। वाट्सएफ नम्बर 94 2462 9494 से । या न्यूज के नीचे जाए और दिए गए वाट्सएफ जवाइन निर्देश बॉक्स में दो बार क्लिक कर ग्रुप में ज्वाइन हो सकते हैं। संतोष दुबे, सिवनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *