सिद्धेश्वर शिव मंदिर महाराज बाग में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह एवं अखंड रामायण पाठ
सिवनी। भगवान को जो जिस भाव से देखता है, उसे वही रूप के दर्शन होते हैं। योगमाया का आश्रय लेकर भगवान ने रासलीला का मन बनाया। परमात्मा सबके पति हैं । धर्ममय कामरूप भगवान की विभूति है। त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से विभिन्न कामना रखने वाले ,सभी भक्तों की इच्छा द्वापर युग में कृष्ण अवतार में पूर्ण किया। उक्ताश्य के सारगर्भित प्रेरक उदगार, भैरोगंज महाराज बाग में प्रतिष्ठित सिद्धेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में चल रहे भागवत कथा प्रसंग के सातवें दिन ,बाल व्यास प्रेमकृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से नि:सृत हुए।
कथा प्रसंग में विद्वान बालव्यास ने कृष्ण की दिव्य लीलाओं का सजीव चित्रण करते हुए, “पंच अध्यायी महारास” का सहज सरल आध्यात्मिक निरूपण किया।
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अक्रूर जी के साथ कृष्ण बलदाऊ का मथुरा पुरी में प्रवेश का वृतांत सुनाया । बाल व्यास ने कथा प्रसंग में रसीली ब्रजभाषा का पुट देते हुए हासपरिहास घोलकर श्रोताओं को भक्ति आनंदरस का पान कराया।
मथुरा में चारुण, मुष्ठिक आदि दैत्यों का वध एवं आततायी कंस के वध का वर्णन किया। पश्चात सांदीपनि आश्रम उज्जैयनी गुरुकुल में शिक्षा के पश्चात गुरु दक्षिणा में गुरु माता को उनके मरे हुए पुत्र को पुनः यमराज से वापस लाकर देना का प्रसंग सुनाया।
आगे कथा प्रसंग में बाल व्यास ने उद्धव जी तथा गोपियों का ज्ञान और भक्ति का संवाद, कृष्ण जरासंध युद्ध का विस्तार से वर्णन किया । आगे के कथा प्रसंग में भगवान कृष्ण की आठ पटरानियों क्रमशः रुक्मणी, जामवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रवृंदा, सत्या, भद्रा, लक्ष्मणा से विवाह की कथा विस्तार से सुनाया। इसी क्रम में नरकासुर वध के पश्चात इसकी कैद से 16100 कन्याओं को मुक्त कराके उनके आग्रह पर ,एक ही मुहूर्त में एक साथ विवाह का वृतांत सुनाया ।
बाल विकास प्रेमकृष्ण शास्त्री ने मंगल गीत के रूप में स्वरचित भजन के साथ ही गुजराती भाषा के गीत का सस्वर गायन करके उपस्थित श्रोता नर नारियों की खूब प्रशंसा तालियां बटोरी। परायण कर्ता ,बाल व्यास के पू.पिता पंडित श्री पुरुषोत्तम शास्त्री जी ने जानकारी दिया कि, 13 जून शनिवार को भागवत कथा का विश्राम होगा। और आगामी 14 जून से अखंड रामायण पाठ, रामकथा प्रारंभ होगी। आयोजन समिति के सदस्यों ने श्रद्धालु नर नारियों से कार्यक्रम में उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।
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