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22 May 2026, Fri

अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु : पं. दिनेश मिश्र

सिवनी/बरघाट। हमें भी श्रीकृष्ण की तरह सत्य को ग्रहण करने वाला सत्संगी बनना चाहिए। भगवान कभी भी किसी के गुण-अवगुण नही देखते हैं। भक्त का कल्याण करते हैं। इसलिए भगवान की भक्ति निष्छल मन से करना चाहिए।उक्ताशय की बात कथावाचक पं. दिनेश मिश्र ने बरघाट के गांव गोरखपुर (खामी) में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुजनों से कही।

उन्होंने आगे कहा कि बाल्यकाल में भगवान द्वारा की गई लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन का गूढ़ संदेश देती हैं। मिट्टी खाने की लीला से लेकर गोपियों के साथ प्रेम और इंद्र का मान मर्दन करने तक, हर घटना में भक्तों के लिए सीख छिपी है। इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान ने गिरिराज की पूजा करायी और यह संदेश दिया कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए, अन्यथा ब्रह्मा जी की तरह कष्ट उठाना पड़ सकता है। उन्होंने भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि चाहे व्यक्ति महलों में रहे या झोपड़ी में, उसके जीवन में भगवान का स्मरण बना रहना चाहिए।

कथा के दौरान पूतना वध, मिट्टी खाने पर मैया यशोदा को मुख में ब्रह्मांड दर्शन, माखन चोरी, उखल बंधन, गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग की झांकियों का सुंदर वर्णन किया गया।

पं. श्री मिश्र ने बताया कि कंस ने भगवान कृष्ण का वध कराने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा था, लेकिन बाल कृष्ण ने उसका संहार कर उसका भी कल्याण कर दिया। कथा में कृष्ण के गौरज स्नान, घुटनों के बल चलकर माखन चुराने, मटकी फोड़ने और ग्वाल बालों को माखन खिलाने की लीलाओं का जीवंत चित्रण किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।

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