सिवनी। विकासखण्ड बरघाट अंतर्गत गांव गोरखपुर (खामी) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को कथावाचक पं. दिनेश मिश्रा ने ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग श्रद्धालुजनों को सुनाया।
उन्होंने कहा कि अगर ध्रुव पांच साल की उम्र में भगवान को पा सकता है, तो फिर हम कैसे पिछड़ सकते हैं। अगर सच्चे मन से भगवान की भक्ति की जाए, तो भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने पहुंच जाते है।
वहीं विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुरजी की कुटिया में भोजन करने गए और वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इससे पहले वे दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे।
भगवान तो प्रेम के भूखे होते हैं और विदुर-विदुरानी ने भगवान को प्रेम से भोजन करवाया तो उन्होंने केले के छिलके भी प्रेम से खा लिए। कथा के दौरान पं. मिश्रा ने श्रद्धालुओं के समक्ष सृष्टि वर्णन के प्रसंग को भी विस्तार से सुनाया। कथा आयोजक गजानंद रहांगडाले ने बताया कि कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंच रहे हैं।


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