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12 Feb 2026, Thu

तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान दी नेट परीक्षा, पहले ही प्रयास में सफल

किसान के बेटे ने लहराया नेट परीक्षा में सफलता का परचम

सिवनी। जिले का धान का कटोरा नाम से मशहूर बरघाट विकासखंड के छोटे से गाँव खमरिया के एक किसान के बेटे ने हिंदी विषय में नेट परीक्षा में सफलता हासिल कर साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी कड़ी मेहनत से सफलता अर्जित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री काॅलेज ऑफ एक्सीलेंस के हिंदी विभाग के चौथे सेमेस्टर के छात्र मेहुल सिंह बिसेन ने अपने पहले ही प्रयास में नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रोफेसर बनने की पात्रता अर्जित कर ली है।

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, बुआ- फूफाजी और दोनों बहनों को देते हुए मेहुल ने बताया कि उनके पिता श्यामसिंह बिसेन छोटे से किसान हैं और माँ संगीता बिसेन घरेलू महिला। बुआ अंजना कटरे और फूफाजी नानकराम कटरे ने अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। बड़ी बहन ने पढ़ाई करने के लिए हमेशा हौसला बढ़ाया. प्रोफेसर बनने की अदम्य लालसा रखने वाले मेहुल ने बताया कि उनके परिवार में अब तक कोई भी शासकीय सेवा में नहीं है। मेहुल की इच्छा प्रोफेसर बनकर ग्रामीण युवाओं में उच्च शिक्षा की अलख जगाना है.

प्रोफेसर्स की भूमिका रही महत्वपूर्ण – अपनी सफलता में प्रधानमंत्री काॅलेज के शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। मेहुल ने बताया कि पीजी काॅलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर सत्येन्द्र कुमार शेन्डे की प्रेरणा रही. बताया कि गुरु के रूप में प्रोफेसर शेन्डे सर ने परीक्षा की तैयारी के लिए हिंदी की संदर्भ पुस्तकों के बारे में जानकारी देकर पढ़ाई का तरीका बताया। हिंदी विभाग की शिक्षिका छाया राय ने भी हमेशा प्रोत्साहित किया और रक्षा राहंगडाले जैसे मित्रों ने भी व्यावहारिक सलाह दी।

खेती किसानी में सहयोग और नेट की परीक्षा साथ-साथ
मेहुल ने बताया कि समय का उचित प्रबंधन और कठिन मेहनत करते हुए उन्होंने एमए के तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं के दौरान ही नेट की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफल हुए. बताया कि नेट परीक्षा नजदीक थी और उस समय खेती किसानी के लिए यूरिया की बड़ी किल्लत थी. कई कई दिनों तक सुबह पांच बजे से ही वह यूरिया के लिए लाइन में लगते थे. देर रात तक नेट की पढ़ाई करते थे.

पीएचडी आसान, नेट परीक्षा कठिन – बताना उचित होगा कि देश के विश्वविद्यालयों और काॅलेजो में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण करना एक अनिवार्य योग्यता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) साल में दो बार नेट परीक्षा का आयोजन करती है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने की तुलना में पीएचडी करना आसान है. जो परीक्षार्थी नेट पास नहीं कर पाते, वे पीएचडी करना आसान समझते हैं.

मेहुल की सफलता पर परिवार-जन, मित्रों, रिश्तेदारों और पीजी काॅलेज के प्राचार्य डाॅ रविशंकर नाग, हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ सविता मसीह, प्रोफेसर सत्येन्द्र शेन्डे, शिक्षिका छाया राय सहित काॅलेज अन्य प्रोफेसर्स एवं स्टाॅफ ने खुशी जाहिर करते हुए मेहुल के उज्ज्वल और सफल भविष्य की कामना की है।

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