सिवनी। लखनवाड़ा जैतपुर के समीपस्थ गांव खैरीकलां में चल रही श्री रामचरित मानस नवाह परायण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को कथा प्रवक्ता सुश्री लक्ष्मीमणि शास्त्री जी ने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान राम की बाल लीलाएं संसार की सकारात्मक और आनंदमयी लीलाएं हैं। रामकथा स्थल में ब्रह्मलीन जगत गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य ब्रह्मचारी सुशीलानंद महाराज का भी आगमन हुआ। जहाँ उन्होंने श्रद्धालुजनों को राम चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सद्गुरु के सानिध्य में रहते हुए ज्ञान लेना चाहिए।
पूज्य गुरूदेव भगवान द्विपीठाधीश्वर ब्रम्हलीन जगद्गुरू शंकराचार्य जी महाराज की शिष्या ने आगे बताया कि पूजा में भाव की महत्ता होती है। प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। यदि हम राम को पाना चाहते हैं, तो वे हमें अनुराग से प्राप्त होंगे। प्रभु की छवि को ही मन में बसाना होगा।
उन्होंने श्रीराम के जन्म का चित्रण करते हुए बताया कि जब श्रीराम ने दशरथ नंदन के रूप में कौशिल्या की कोख से जन्म लिया, तो दासियां दौड़ पड़ीं। अयोध्या सजने लगी और जन-जन में उत्साह छा गया। पूरे अयोध्या में शहनाई की आवाज गूंज रही थी। उन्होंने कहाकि भगवान राम की बाल लीला में ही उनका साम्यवादी चिंतन और क्रियात्मक रूप स्पष्ट होता है। जब वे दशरथ के आंगन में विहार करते हैं और महाराज दशरथ उन्हें भोजन के लिए बुलाते हैं, तो वे समता के पोषक होकर अपने बाल सखाओं के साथ खेलते हैं। आयोजक – सर्वश्री समस्त ग्रामवासी खैरीकलां ने बताया कि हवन पूजन भंडारा प्रसाद वितरण 4 फरवरी को होगा।






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