सिवनी। मध्य प्रदेश में वरिष्ठ आईएएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान पर ब्राह्मण और सवर्ण संगठनों में खासा आक्रोश व्याप्त है। गुरुवार को दोपहर बड़ी संख्या में मौजूद महिला-पुरुष ब्राह्मणों ने नारे बाजी करते हुए, सख्त कार्यवाही की मांग किए जाने को लेकर जिला ब्राह्मण समाज ने आज बड़ी संख्या में एकजुट होकर रैली निकाली और महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता को सौंपा।
पं. दिलीप तिवारी अध्यक्ष जिला ब्राह्मण समाज, सिवनी, मध्यप्रदेश ने बताया कि आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की बहू बेटियों के प्रति की गई अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी से ब्राह्मण समाज में आक्रोश व्याप्त है। वहीं अजय अज्जू मिश्रा ने भी सख्त से सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग व उन्हें पद से अलग किए जाने की मांग करते हुए कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो ब्राह्मण शांत नहीं बैठेगा और आगे भी वह संगठित होकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
गौरतलब है कि जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बना ले…; आरक्षण पर इस तरह की दलील देकर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। ब्राह्मण और सवर्ण संगठन उबल पड़े हैं, लेकिन आरक्षण, दलित, सवर्ण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नफा-नुकसान को भांपते हुए अधिकतर राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं। ब्राह्मणों ने अधिकारी के बयान की निंदा करते हुए उन पर कार्रवाई की मांग की है।
ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित दिलीप तिवारी ने कहा कि अनुसूजित जाति, जन जाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के प्रांतीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद इसके पहले अधिवेशन के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने मंच से विवादित टिप्पणी की जो उनकी गंदी मानसिकता दर्शाती है।

उन्होंने ‘एक परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण’ की सोच के विरोध में दलील देते हुए कह दिया कि यह तब तक मंजूर नहीं होगा जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उसका उससे संबंध ना बना ले। सोशल मीडिया पर संतोष वर्मा का यह बयान वायरल हो गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके बयान की तीखी आलोचना की।
ब्राह्मण समाज के अनेक लोगों ने आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के बयान की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस तरह के मानसिक दिवालियेपन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘एक वरिष्ठ अधिकारी का इस प्रकार का जातिगत और स्त्री-विरोधी बयान न केवल घोर आपत्तिजनक है, बल्कि समाज को बांटने वाली मानसिकता का खुला प्रमाण भी है। मैं स्वयं एक ब्राह्मण हूं, और हमारी परंपरा ‘सम्मान’ सिखाती है, ‘अपमान’ नहीं। देश की बहन-बेटियों को ‘दान’ की वस्तु समझने वाली सोच घोर निंदनीय है। यह विचार न सिर्फ घटिया है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक मर्यादा का भी अपमान है। सरकार ऐसे मानसिक दिवालियेपन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।’
ब्राह्मणों ने कहा, ‘शायद किसी ने संतोष वर्मा की बुद्धि को हर लिया है। यह समाजिक ताने बाने को तोड़ने का बयान है। उन्होंने ना सिर्फ ब्राह्मण बेटियों के बारे में टिप्पणी है, बल्कि हर जाति और धर्म के बहन बेटियों के बारे में है। समाज के लोग चाहें वे भाजपा के हों या कांग्रेस के हो या किसी भी अन्य राजनैतिक पार्टी, दलों से हो, जो परशुराम को मानने वाले लोग हैं उनसे आग्रह है कि हम सब मिलकर ज्ञापन देकर इनके निष्कासन की मांग करनी चाहिए।’

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