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19 Mar 2026, Thu

फर्जीवाड़ा : कलेक्टर से की रजिस्ट्री को निरस्त कर उच्च स्तरीय जांच की मांग

सिवनी। फर्जी एवं नियम-विरुद्ध विक्रय अनुमति प्रदान करने तथा रजिस्ट्री को निरस्त करने के संबंध में उच्च स्तरीय जांच कराये जाने के लिए पीड़ित ने कलेक्टर को आवेदन देकर जांच की मांग की है।

इस मामले में बताया गया कि सिवनी जिले में आदिवासी भूमि के संरक्षण हेतु बनाए गए संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों की अवहेलना करते हुये एक गंभीर प्रकरण सामने आया है। जिसमें दुलीचंद उईके पिता दीपकरन उइके द्वारा अपनी आदिवासी कृषि भूमि के विक्रय हेतु विभिन्न स्तरों पर आवेदन प्रस्तुत कर अंततः संदिग्ध परिस्थितियों में अनुमति प्राप्त की गई। यह पूरा प्रकरण आदिवासी हितों के शोषण एवं प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी को दर्शाता है। इस संबंध में, मैं देवी सिंह अरबे, ब्लॉक अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सिवनी, निवासी जिला सिवनी, संपूर्ण तथ्यों एवं साक्ष्यों सहित एक अत्यंत गंभीर, संवेदनशील एवं आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामले को आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ। यह प्रकरण न केवल आदिवासी भूमि संरक्षण अधिनियमों का उल्लंघन है, बल्कि राजस्व अधिकारियों एवं रजिस्ट्री कार्यालय की गंभीर लापरवाही तथा संदिग्ध कार्यप्रणाली को भी दर्शाता है।

प्रकरण का तथ्यात्मक विवरण 12 बिदुओं पर आधारित आवेदन बिंदुबार आपकी ओर न्यायोचित कार्यवाही हेतु आपकी ओर प्रेषित है।

  1. भूमि का विवरण, आदिवासी श्री दुलीचंद उइके पिता दीपकरण उइके, निवासी ग्राम ढुंगरिया, तहसील छपारा, जिला सिवनी की 25 एकड़ से अधिक कृषि भूमि, जो ग्राम नकटिया, पटवारी हल्का क्रमांक 06. राजस्व निरीक्षक मंडल बेडोल में स्थित है, जो कि अनुसूचित जनजाति वर्ग की भूमि है। उक्त भूमि को श्रीमती किरण अवधिया पिता श्रीचंद अवधिया, निवासी छपारा, द्वारा नियम-विरुद्ध, असंगत एवं शोषणपूर्ण तरीके से अत्यल्प मूल्य पर क्रय कर लिया गया है।
  2. नयब तहसीलदार बंडोल के समक्ष प्रथम आवेदन के तहत दुलिचंद उइके द्वारा नायब तहसीलदार बंडोल के न्यायालय में भूमि विकय की अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। जिसमें न्यायालय द्वारा विक्रेता एवं प्रस्तावित खरीददार श्रीमती किरण अवधिया (उपाध्याय) को शपथ पत्र सहित उपस्थित होने के निर्देश दिये गये थे किंतु न तो आवेदक और न ही खरीददार उपस्थित हुये, फलस्वरूप प्रकरण कमांक 0154/21-16-17 में आवेदन निरस्त कर दिया गया।
  3. कमिश्नर कार्यालय जबलपुर में प्रथम अपील इसके पश्चात दुलीचंद उड़के द्वारा कमिश्नर कार्यालय जबलपुर में अपील क्रमांक 03032019.20 प्रस्तुत की गई। दिनांक 20 सितंबर 2022 को सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ‌द्वारा यह कहकर अपील वापस ले ली गई कि अधीनस्थ न्यायालय में नवीन तथ्यों के साथ पुनः आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार उस समय अनुमति प्रदान किए जाने की कोई स्थिति नहीं बन पा रही थी।
  4. कलेक्टर कार्यालय सिवनी में अपील तत्पश्चात जिला कलेक्टर कार्यालय सिवनी में अपील प्रकरण क्रमांक 0072/212223 प्रस्तुत किया गया, जिसे दिनांक 22 दिसंबर 2022 को नायब तहसीलदार ‌द्वारा पूर्व में पारित आदेश के आधार पर निरस्त कर दिया गया।
  5. कमिश्नर के समक्ष पुनः अपील एवं अनुमति इसके पश्चात पुनः कमिश्नर कार्यालयए जबलपुर में अपील क्रमांक 0257/24:25 प्रस्तुत की गई जिसमें दिनांक 13 नवंबर 2024 को भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान कर दी गई। जबकि आदेश में स्वयं यह उल्लेख है कि दुलीचंद उड़के शासकीय सेवक रहे हैं उच्चतर माध्यमिक वि‌द्यालय से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं तथा उन्हें नियमित पेंशन प्राप्त हो रही है।
  6. नियमों के विरुद्ध आर्थिक आवश्यकता का आधार अनुमति हेतु आवेदक द्वारा बच्चों की भोपाल में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी मकान खरीदने एवं इलाज की आवश्यकता का हवाला दिया गया जबकि 15 लाख की राशि में भोपाल जैसे महानगर में मकान खरीदना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
  7. अत्यंत कम मूल्य पर भूमि विक्रय दुलीचंद उड़के ‌द्वारा अपनी 25 एकड़ से अधिक बहुमूल्य भूमि को मात्र 18,00,000 में छपारा इंगरिया निवासी श्रीमती किरण अवधिया को विक्रय किया गया जबकि उक्त भूमि का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में आंका जा रहा है।
  8. आदिवासी भूमि शोषण का संगठित स्वरूप शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले जिन अधिकारियों के समक्ष अनुमति संभव नहीं हुई वहां से अपील वापस लेकर नए अधिकारी के समक्ष भ्रामक एवं अपूर्ण तथ्यों के आधार पर अनुमति प्राप्त की गई।
  9. सिवनी जिले में इस प्रकार आदिवासी भूमि को कम कीमत पर क्रय कर बाद में अत्यधिक मूल्य पर विक्रय किए जाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
  10. नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारियों की भूमिका प्रकरण में नायब तहसीलदार स्तर से लेकर उच्च कार्यालयों तक की कार्यवाही संदेह के घेरे में है जिससे प्रशासनिक लापरवाही अथवा मिलीभगत की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग करते हुए कहा कि उक्त संपूर्ण प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। भूमि विक्रय हेतु दी गई अनुमति को स्थगित किए जाने पर विचार किया जाए। नायब तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए। आदिवासी भूमि संरक्षण कानूनों के उल्लंघन पर कठोर कदम उठाए जाएं। भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु प्रभावी निर्देश जारी किए जाएं। महोदय यह प्रकरण आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है अतः इस पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई अपेक्षित है।

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