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21 Mar 2026, Sat

600 श्रृद्धालु उठायेंगे महादेव की कांवड़

28 जुलाई को छिंदवाहा के नर्मदा तट से निकलेगी विशाल कांवड़ यात्रा,

घंसौर में जोरशोर से चल रही कांवड़ यात्रा की तैयारियां

सिवनी। किंदरई। कांवड़ यात्रा एक प्राचीन हिंदू तीर्थ यात्रा है, जिसमें श्रद्धालु जिन्हें प्रेम से कांवड़िया कहा जाता है। वह गंगा जल लेकर भगवान शिव के मंदिरों में अर्पित करने जाते हैं। विशेष रूप से सावन मास में यह यात्रा अत्यधिक महत्व रखती है। यह परंपरा पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक आस्था से जुड़ी हुई है, और आज यह दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक बन चुकी है।

यह यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। हर वर्ष सावन मास में जब बारिश की बूंदें धरती को शीतल करती हैं, तब लाखों शिवभक्त केसरिया वस्त्र पहनकर कांवड़ लेकर निकलते हैं। उनके कांधे पर बांस की बनी कांवड़ होती है, जिसमें गंगाजल से भरे कलश झूलते हैं। ये भक्त गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों से जल लेकर शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।

यह पवित्र परंपरा कांवड़ यात्रा कहलाती है, जिसकी जड़ें अत्यंत प्राचीन पौराणिक कथाओं से जुड़ी हैं। इन दिनों हर तरफ कांवड़ यात्राएं श्रृद्धालुओं द्वारा निकाली जा रहीं हैं।

इसी कड़ी में प्राप्त जानकारी के मुताबिक आगामी 28 जुलाई दिन सोमवार को निकाली जा रही कांवड़ यात्रा में नगर घंसौर के लगभग 600 श्रृद्धालु शामिल हो रहे हैं। बताया गया कि 28 जुलाई को सुबह 7 बजे सभी कांवड़िया स्थानीय श्री राम मंदिर परिसर में एकत्रित होकर दोपहिया व चौपहिया वाहनों के माध्यम से घंसौर के ग्राम किंदरई से चार किलोमीटर दूर नर्मदा नदी छिंदवाहा छटा घाट पहुंचेंगे और उक्त ग्राम के नजदीक प्रवाहित हो रही मां श्री नर्मदा जी का जल लेकर घंसौर के लिए सुबह के लगभग 10 बजे रवाना होंगे। उक्त कांवड़ यात्रा को लेकर नगर घंसौर में तैयारियां जोरशोर से चल रही है और लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

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