धर्म मध्य प्रदेश सिवनी

सुख-दुख का आना-जाना प्रारब्ध कर्म के कारणों से निहित होता है : पं. हितेंद्र शास्त्री

केवलारी।  ग्राम थांवरी (रायखेड़ा) में पंडित हितेंद्र शास्त्री के मुखारविंद से श्रीमद् देवी भागवत महापुराण खैरमाई मंदिर मे नवरात्र प्रथमा तिथि से अनवरत चल रही है। कथा के सातवें दिवस महाराजश्री ने कन्या पूजन , सुहाग पूजन, भैरव पूजन, का महत्व बताते हुए व्रत करने की वास्तविक परिभाषा परिभाषित किया।

शास्त्री जी ने बताया कि नवरात्र 9 दिनो तक यदि व्रत ना कर पाये तो सप्तमी अष्टमी एवं नवमी में ही जो व्रत कर लेता है वह नवरात्रि के नो दिनों के फल को प्राप्त करता है। उन्होंने आगे बताया कि प्रराब्ध के कर्म के अनुसार ही वर्तमान में मानव जीवन में सुख-दुख की घटना घटित होती है। भीष्म पितामह जैसे ब्रह्मचारी महारथी को भी 6 माह तक बाणो की सैया की सेज मिली उसका कारण भी सर्प दोष था जो पूर्व जन्म में उनके द्वारा अनजाने में हुआ था।

सत्संग से ही सद्बुद्धि प्राप्त होती है और सद्बुद्धि से ही संपूर्णता की प्राप्ति होती है। सत्संग से दुविधा केसे मिटती है बहुत सुंदर वृतांत बताते हुये बुढ़ी माई ओर खैरमाई की कथा का शानदार प्रसंग बताकर सत्संग की महत्वता बताई। श्रीमद् देवी महापुराण कथा में पहुंचकर रमाशंकर महोबिया बारिष्ठ पत्रकार एवं राजेंद्र सिंह पटेल चरगांव ने व्यासपीठ की पुजन कर महाराजश्री का आशीर्वाद  प्राप्त किया।

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