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25 Jun 2026, Thu

प्रेम रूपी गंगा अभिमान रूपी पहाड़ पर कभी प्रवाहित नहीं होती : निर्विकल्प स्वरूप

सिवनी। विकासखंड केवलारी के गांव सरेखा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठ दिवस में पूज्य गीतामनीषी ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने बताया हमारे पूज्य गुरुदेव जगदगुरु जी महाराज बताते हैं, की रासलीला काम पर विजय की लीला है। काम जो है सब का बाप है पर श्री कृष्ण जो हैं काम के भी बाप हैं सरेखा में श्रीमद् भागवत कथा में जहां दूर-दूर से पधारे सभी भगवत रसिकों ने इस कथा अमृत का रसपान किया।

व्यासपीठ में विराजित जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के प्रिय शिष्यों में पूज्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज द्वारा धर्मोपदेश दिया गया। वासना ही बंधन का कारण है यह वासना से मुक्त होना है तो भगवान के प्रति अनुराग चैतन्य एवं भक्ति को अपने जीवन में लाना श्रेयस्कर है। प्रेम रूपी गंगा कभी अभिमान रूपी पहाड़ पर कभी प्रवाहित नहीं होती विनय रूपी समतल पर ही प्रवाहित होती है। भगवान की भक्ति पर विनम्र होना चाहिए।

व्यासपीठ से पूज्य ब्रह्मचारी जी ने कहा की काम क्रोध लोभ एवं मोह इंसान संसार से चित हटाकर परमात्मा में लगा ले तो उन्हें भी गोपियों की तरह भगवान की प्राप्ति होती है गोपिया रोती हैं, आंसू बहाती हैं तो भगवान प्रेम रस में वृंदावन पहुंच जाते हैं भक्त को भी भगवान सरलता से नहीं मिल पाते भगवान का प्रेम स्नेह पाने के लिए करुणा के आंसू बहाने होते हैं।

महाराज भगवान कृष्ण और गोपियों की उसे अद्भुत अभिभूत करने वाली नृत्य एवं संगीत की अनुपम लीला है। यह चेतना का परम चेतन से मिलान का संयोग है यह भक्ति की शुद्धतम अवस्था है । गोपिया कोई साधारण स्त्रियां नहीं है, बल्कि वेद की रचनाएं हैं प्रेम युक्त साधना से परमात्मा को पाना ही महारास है।

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